Monday, April 24, 2017

कबीर से शिकायत

यह विचार तब लिखा जब मैं The Incredible Life of a Himalayan Yogi, The Times, Teachings, and Life of Living Shiva Baba Lokenath Brahmachari by Shuddhaanandaa Brahmachari पढ़ रहा था | 

उस किताब के Chapter 5, Self Realisation and Devotion to Guru एक अजब सी कहानी लिखी गई है | 

बाबा लोकनाथ ने 90 साल की उमर में परम स्थान की प्राप्ति कर ली थी | उस समय उन के गुरु, गुरु भग्वान गांगुली 150 वर्ष के थे | जब यह घटना घटी तो गुरु गांगुली बहुत खुश हुए थे | तब गुरु गांगुली अपने शिष्य लोकनाथ से याचना करने लगे कि हे लोकनाथ अब तुम मेरे गुरु बन कर मुझे भी परम स्थान प्राप्त करवाने का कार्य करो | उस के लिए वह काशी जायेंगे और वहां जाकर गुरु भग्वान अपना शरीर त्याग देंगे | तब लोकनाथ का यह कार्य होगा कि वह नए जन्म में पैदा हुए गुरु भग्वान को पहचानेगे| उन के गुरु बनेंगे और फिर उन को परम स्थान प्राप्त करवायेंगे| 

गुरु शिष्य को कहता है कि शिष्य गुरु का गुरु बन कर गुरु को मोक्ष दिलवाए | यह कहानी बड़ी रोचक है | 


Sunday, April 23, 2017

स्थिर - यह संभव नहीं

स्थिर - यह संभव नहीं 

धरती अपनी धुरी पर 1670 km/h की गति से घूमती है| धरती सूर्य के इर्द गिर्द १०८,००० km/h  की गति से चक्कर लगाती है | 

समय बदलता है तो स्थान बदल चुका होता है | 
स्थान बदलता है तो समय बदल चुका होता है | 
समय और स्थान बदलते रहतें हैं | 

आप एक जगह पर बैठे हो | आप कहते हो कि मैं तो स्थिर हूँ | अगर क़ुछ बदला है तो समय बदला है | समय अविरल बदलता रहता है | इसे जब दूसरी तरह कहना चाहोगे तो बोलोगे कि समय तो चलता रहता है | व्यक्ति तो वहीं का वहीं रहता है | 

उपर दिया गया तथ्य भी तो सच है | धरती के साथ आप भी तो चलते रहते हैं यां युं कहें के चक्कर लगा रहें हैं | आप कभी भी स्थिर नहीं होते हो | 

अब अगर स्थान अविरल बदलता रहता है तो क्या यह भी कहा जा सकता है कि स्थान तो चलता रहता है ?

यह सड़क कहां जा रही है ?
कहीं नहीं, यह यहीं रहती है | 

यह कैसा बोध है ? पहले प्रशन का अभिप्राय स्पष्ट क्यों नहीं हुआ ? उत्तर में जो कहा गया है क्या वह एक नया प्रशन को ढूंढ़ता है | 

एक longitude पर बैठा व्यक्ति दुसरे longitude के व्यक्ति को कभी भी नहीं प्राप्त कर पाता | 


In reference to his surroundings, a man can claim that he is still. In reference to fixed Sun and Stars, the path of the earth is fixed but on the surface of the earth, everything is changing because of the rotation and revolution. 

Can there be another reference far off in the space, in relation&nbto which, even Sun and Stars also keep changing? 

If it is true to one arrangement, then why is it not true for the other arrangement, that it, Sun and Stars? 

Space is vast. It is possible or Can it be possible. 

Life seems to have a different meaning. In reference to our surroundings, we merely have mundane meaning. 


Kindly note: It is in reference to my reading of Vic Dicara which I have reviewed HERE, the parent blog of this blog. 

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