Monday, April 24, 2017

कबीर से शिकायत

यह विचार तब लिखा जब मैं The Incredible Life of a Himalayan Yogi, The Times, Teachings, and Life of Living Shiva Baba Lokenath Brahmachari by Shuddhaanandaa Brahmachari पढ़ रहा था | 

उस किताब के Chapter 5, Self Realisation and Devotion to Guru एक अजब सी कहानी लिखी गई है | 

बाबा लोकनाथ ने 90 साल की उमर में परम स्थान की प्राप्ति कर ली थी | उस समय उन के गुरु, गुरु भग्वान गांगुली 150 वर्ष के थे | जब यह घटना घटी तो गुरु गांगुली बहुत खुश हुए थे | तब गुरु गांगुली अपने शिष्य लोकनाथ से याचना करने लगे कि हे लोकनाथ अब तुम मेरे गुरु बन कर मुझे भी परम स्थान प्राप्त करवाने का कार्य करो | उस के लिए वह काशी जायेंगे और वहां जाकर गुरु भग्वान अपना शरीर त्याग देंगे | तब लोकनाथ का यह कार्य होगा कि वह नए जन्म में पैदा हुए गुरु भग्वान को पहचानेगे| उन के गुरु बनेंगे और फिर उन को परम स्थान प्राप्त करवायेंगे| 

गुरु शिष्य को कहता है कि शिष्य गुरु का गुरु बन कर गुरु को मोक्ष दिलवाए | यह कहानी बड़ी रोचक है | 


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